मंगलवार, 16 फ़रवरी 2016

गुमशुदा लोगों की तलाश है मुझे


मिथिलेश आदित्य
गुमशुदा लोगों की तलाश है मुझे,
मिलेगा कहीं नसीब पे आस है मुझे ।

वक्त चाहे करवट ले बहरुपियों सा,
बेनकाब करने के शीशे पास है मुझे ।

तुम्हें देखकर सगुन बनता है ऐसा,
कि देता साथ जमीं आकाश है मुझे ।

ऊपज फिजा का हुआ हूँ देखो कैसा,
सहर ए जिन्दगी कर रहा नाश है मुझे ।

भीड़ इतना बड़ा क्यूँ हुआ काहिलों का,
यह सवाल कर जाता उदास है मुझे ।

हालातों से बाँधे गए जिनके बढ़े कदम,
सचमुच वो दिखने लगा लाश है मुझे ।
...

तुमने मुझसे ऐसी दोस्ती की है

-मिथिलेश आदित्य
तुमने मुझसे ऐसी दोस्ती की है,
प्यार से जिन्दगी में रोशनी दी है ।

मिली तुम तो मैं इक मकाम पाया,
मेरे दिल में रहती तितली सी है ।

होंगे नहीं हम — तुम कभी जुदा,
जमीं इक चराग की असली सी है ।

सच सामने बोला नहीं जा रहा,
जुबां हो गयी अब नकली सी है ।

तुमको पाकर उग रहा आदित्य,
पास रहकर तुम जिन्दगी सी है ।
...